लोकमान्य तिलक का स्वतंत्रता आन्दोलन में अतुलनीय योगदान है। उन्होंने अपने जीवन का क्षण-क्षण राष्ट्र को समर्पित कर क्रांतिकारियों की एक वैचारिक पीढ़ी तैयार की। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वराज्य की आवाज बुलंद की और "स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा" के नारे से देश में साहस व विश्वास जगाया। लोकमान्य तिलक भारतीय संस्कृति व उसकी चेतना की आत्मा हैं। वह अस्पृश्यता के प्रबल विरोधी थे उन्होंने जाति और संप्रदायों में बंटे समाज को एक बनाने के लिए बड़ा जनआंदोलन चलाया। अंग्रेजी शासन से डरे लोगों को बाहर निकालने और स्वाधीनता के लिए प्रेरित करने के लिए तिलक जी ने ही सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत की। लोकमान्य तिलक जी का अध्ययन असीमित था, उनके विचारों, कृतित्व और शोधों में उनके गहन अध्ययन को साफ देखा जा सकता है। तिलक जी का मानना था कि जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हो तब भक्ति और मोक्ष नहीं कर्मयोग की जरूरत होती है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास के ऐसे वीर नायक को उनकी 100वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि।

Amit Shah, BJP Leader, amit shah BJP, Bhartiya Janta Party leader, bjp president, amit shah official | Amitbhai Anilchandra Shah (Amit Shah) is an Indian politician from Gujarat and the current President of the Bharatiya Janata Party.

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लोकमान्य तिलक का स्वतंत्रता आन्दोलन में अतुलनीय योगदान है। उन्होंने अपने जीवन का क्षण-क्षण राष्ट्र को समर्पित कर क्रांतिकारियों की एक वैचारिक पीढ़ी तैयार की। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वराज्य की आवाज बुलंद की और "स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा" के नारे से देश में साहस व विश्वास जगाया।

लोकमान्य तिलक भारतीय संस्कृति व उसकी चेतना की आत्मा हैं। वह अस्पृश्यता के प्रबल विरोधी थे उन्होंने जाति और संप्रदायों में बंटे समाज को एक बनाने के लिए बड़ा जनआंदोलन चलाया। अंग्रेजी शासन से डरे लोगों को बाहर निकालने और स्वाधीनता के लिए प्रेरित करने के लिए तिलक जी ने ही सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत की।

लोकमान्य तिलक जी का अध्ययन असीमित था, उनके विचारों, कृतित्व और शोधों में उनके गहन अध्ययन को साफ देखा जा सकता है। तिलक जी का मानना था कि जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हो तब भक्ति और मोक्ष नहीं कर्मयोग की जरूरत होती है।

भारतीय स्वतंत्रता इतिहास के ऐसे वीर नायक को उनकी 100वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि।

लोकमान्य तिलक का स्वतंत्रता आन्दोलन में अतुलनीय योगदान है। उन्होंने अपने जीवन का क्षण-क्षण राष्ट्र को समर्पित कर क्रांतिकारियों की एक वैचारिक पीढ़ी तैयार की। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध स्वराज्य की आवाज बुलंद की और "स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा" के नारे से देश में साहस व विश्वास जगाया। लोकमान्य तिलक भारतीय संस्कृति व उसकी चेतना की आत्मा हैं। वह अस्पृश्यता के प्रबल विरोधी थे उन्होंने जाति और संप्रदायों में बंटे समाज को एक बनाने के लिए बड़ा जनआंदोलन चलाया। अंग्रेजी शासन से डरे लोगों को बाहर निकालने और स्वाधीनता के लिए प्रेरित करने के लिए तिलक जी ने ही सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत की। लोकमान्य तिलक जी का अध्ययन असीमित था, उनके विचारों, कृतित्व और शोधों में उनके गहन अध्ययन को साफ देखा जा सकता है। तिलक जी का मानना था कि जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हो तब भक्ति और मोक्ष नहीं कर्मयोग की जरूरत होती है। भारतीय स्वतंत्रता इतिहास के ऐसे वीर नायक को उनकी 100वीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि।

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