अद्वैत वेदांत के प्रणेता, सनातन धर्म के प्राणधार, वेदों के परम विद्वान एवं एक प्रखर भविष्यदृष्टा आदि शंकराचार्य जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन। अनेकों पंथों एवं विचारों की चुनौतियों से निपटने और समाज को सत्य का दर्शन कराने के लिए आदि शंकराचार्य जी ने अद्वैत वेदांत का मार्ग प्रशस्त किया। आदि शंकराचार्य जी ने अल्पायु में अपने ज्ञान से सनातन धर्म और वेदों का अस्तित्व और प्रतिष्ठा अनंत काल तक बनाए रखने एवं भारत को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए देश की चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किये। आज भी यह चार मठ सनातन धर्म के सर्वोच्च मानदण्ड के प्रतीक हैं। वेदोक्त सनातन, शाश्वत जीवन दर्शन एवं धर्म में भगवान श्री आद्य शंकराचार्य का स्थान निश्चित रूप से सर्वोपरि है। उनकी ज्ञान, विद्या और तर्क की नींव पर हमारी संस्कृति पुष्पित एवं पल्लवित हुयी। आदि शंकराचार्य जी की जयंती हमें हमारी गौरवमयी संस्कृति को सहजने एवं उसको गौरव प्रदान करने के लिए प्रेरित करती है।

Amit Shah, BJP Leader, amit shah BJP, Bhartiya Janta Party leader, bjp president, amit shah official | Amitbhai Anilchandra Shah (Amit Shah) is an Indian politician from Gujarat and the current President of the Bharatiya Janata Party.

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अद्वैत वेदांत के प्रणेता, सनातन धर्म के प्राणधार, वेदों के परम विद्वान एवं एक प्रखर भविष्यदृष्टा आदि शंकराचार्य जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन। अनेकों पंथों एवं विचारों की चुनौतियों से निपटने और समाज को सत्य का दर्शन कराने के लिए आदि शंकराचार्य जी ने अद्वैत वेदांत का मार्ग प्रशस्त किया।
आदि शंकराचार्य जी ने अल्पायु में अपने ज्ञान से सनातन धर्म और वेदों का अस्तित्व और प्रतिष्ठा अनंत काल तक बनाए रखने एवं भारत को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए देश की चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किये। आज भी यह चार मठ सनातन धर्म के सर्वोच्च मानदण्ड के प्रतीक हैं।
वेदोक्त सनातन, शाश्वत जीवन दर्शन एवं धर्म में भगवान श्री आद्य शंकराचार्य का स्थान निश्चित रूप से सर्वोपरि है। उनकी ज्ञान, विद्या और तर्क की नींव पर हमारी संस्कृति पुष्पित एवं पल्लवित हुयी। आदि शंकराचार्य जी की जयंती हमें हमारी गौरवमयी संस्कृति को सहजने एवं उसको गौरव प्रदान करने के लिए प्रेरित करती है।

अद्वैत वेदांत के प्रणेता, सनातन धर्म के प्राणधार, वेदों के परम विद्वान एवं एक प्रखर भविष्यदृष्टा आदि शंकराचार्य जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन। अनेकों पंथों एवं विचारों की चुनौतियों से निपटने और समाज को सत्य का दर्शन कराने के लिए आदि शंकराचार्य जी ने अद्वैत वेदांत का मार्ग प्रशस्त किया। आदि शंकराचार्य जी ने अल्पायु में अपने ज्ञान से सनातन धर्म और वेदों का अस्तित्व और प्रतिष्ठा अनंत काल तक बनाए रखने एवं भारत को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए देश की चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किये। आज भी यह चार मठ सनातन धर्म के सर्वोच्च मानदण्ड के प्रतीक हैं। वेदोक्त सनातन, शाश्वत जीवन दर्शन एवं धर्म में भगवान श्री आद्य शंकराचार्य का स्थान निश्चित रूप से सर्वोपरि है। उनकी ज्ञान, विद्या और तर्क की नींव पर हमारी संस्कृति पुष्पित एवं पल्लवित हुयी। आदि शंकराचार्य जी की जयंती हमें हमारी गौरवमयी संस्कृति को सहजने एवं उसको गौरव प्रदान करने के लिए प्रेरित करती है।

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